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सीखने के रास्ते

ता प्लेटफाॅर्म में सीखने के विभिन्न पथ मौजूद हैं, और प्रत्येक पथ में साइट के विभिन्न वर्गों से चयनित पाठ शामिल हैं जो छात्र को उस की आवश्यकताओं के अनुसार कानूनी ज्ञान (शरई जानकारी) का निर्माण करने में मदद करते हैं।

ऐसी चीज़ें जिन से कोई मुस्लिम ना वाक़िफ़ (अज्ञात) नहीं रह सकता

शरिअते इस्लामीया ऐसे अहकाम (विधि विधान) ले कर आई है जिन का सीखना तथा उन पर अमल करना सभी मुसलमानों पर वाजिब है। और यह अहकाम बड़े आसान और सुविधाजनक हैं, क्योंकि इस्लामी शरिअत हितों को लाने और बुराई को दूर करने पर आधारित है। इसी तरह इन अहकाम की ख़ूबी और विशेषता यह है कि इन का मसदर (स्रोत) इलाही तथा रब्बानी है, और इन अहकाम को लोगों के सामने बयान करने वाले वह हैं जो लोगों में सब से जानकार हैं, भाषा में उन में सब से अधिक वाक्पटु (फ़सीह) हैं, और अपनी उम्मत के लिए उन में सब से ज़्यादा ख़ैरख़ाह (कल्याणकामी) हैं, और वह हैं नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम।

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न्यू मुस्लिम

व्यक्ति के इस्लाम में प्रवेश करते ही वह इस सांसारिक जीवन में एक ऐसी यात्रा की शुरूआत करता है जो उस की गुज़री हुई ज़िंदगी से अलग है। और उस को इस यात्रा में कई तरह के मालूमात और जानकारीयों की आवश्यकता होगी, ताकि वह अपने अक़ीदे को सही और उस की हिफ़ाज़त कर सके, और अल्लाह ने जो उस पर फ़र्ज़ किया है उन कर्तव्यों को अदा कर सके, और ईमान व इस्लाम के रैंकों में धीरे-धीरे ऊपर उठ सके। हम ने उस के लिए इस ट्रेक में उन चीज़ों को एकत्र किया है जो इस लक्ष्य को अल्लाह के हुक्म से पूरा करेंगी।

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वित्तीय लेनदेन (माली मामले)

इस्लाम धर्म जीवन के सभी क्षेत्रों के लिए एक व्यापक धर्म है। यह इबादत का भी धर्म है और लेन-देन का भी धर्म है। और बंदों को इन सभी में इस्लामी कानून के हुक्म को जानने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है, ताकि उन का काम उस चीज़ के अनुसार हो जिसे अल्रलाह तआला पसंद फ़रमाता है और जिस से प्रसन्न होता है। और पवित्र कुरान में लेन-देन और अनुबंधों से संबंधित सटीक विवरण उल्लिखित (मज़कूर) हैं। और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भी अपनी उम्मत के लिए उन चीज़ों को बयान फ़रमाया है जिन की उन को आवश्यकता है, जैसे वित्तीय लेनदेन में से ख़रीद व फ़रोख़्त के अहकाम वग़ैरा। हम इस अध्याय में उन्ही में से चंद बातों का उल्लेख करेंगे।

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मुस्लिम परिवार

इस्लाम ने परिवार पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया और पूरी देखभाल की, क्योंकि शरीअत बंदों की दुनिया और आख़िरत के हितों के लिए मार्गदर्शन करने पर आधारित है, और समाज उस वक़्त तक अच्छा नहीं हो सकता जब तक परिवार अच्छे न हो जायें जिन से समाज गठित होता है। और शरिअत विस्तृत अहकाम (विधि विधान), उत्तम शिष्टाचार, और एक ऐसी सूक्ष्य प्रणाली (बारीक सिस्टम) ले कर आई है जो परिवार का निर्माण और संरक्षण करती है। पस उस ने परिवार के प्रत्येक सदस्य के कर्तव्य और साथ ही उस के अधिकारों को स्पष्ट कर दिया है।

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मुस्लिम महिला

इस्लामी शरीअत ने महिलाओं को सम्मानित किया है। और इस के लिए अल्लाह तआला की किताब और उस के रसूल सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम की जीवनी में बहुत सारे सबूत हैं। और इस्लाम ने महिलाओं को जिन चीज़ों से सम्मानित किया है उन में एक यह है कि उन के लिए स्पेशल विधि विधान बनाया है जो उन की विशेषताओं और ख़ुसूसीयतों को ध्यान में रखते हैं, और उन के अधिकारों को संरक्षित करते हैं, और उन्हें अश्लीलता और दुर्भावनापूर्ण और दिल के बीमार लोगों की महत्वाकांक्षाओं से बचाते हैं।

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