सीखते रहो

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ऐसी चीज़ें जिन से कोई मुस्लिम ना वाक़िफ़ (अज्ञात) नहीं रह सकता

शरिअते इस्लामीया ऐसे अहकाम (विधि विधान) ले कर आई है जिन का सीखना तथा उन पर अमल करना सभी मुसलमानों पर वाजिब है। और यह अहकाम बड़े आसान और सुविधाजनक हैं, क्योंकि इस्लामी शरिअत हितों को लाने और बुराई को दूर करने पर आधारित है। इसी तरह इन अहकाम की ख़ूबी और विशेषता यह है कि इन का मसदर (स्रोत) इलाही तथा रब्बानी है, और इन अहकाम को लोगों के सामने बयान करने वाले वह हैं जो लोगों में सब से जानकार हैं, भाषा में उन में सब से अधिक वाक्पटु (फ़सीह) हैं, और अपनी उम्मत के लिए उन में सब से ज़्यादा ख़ैरख़ाह (कल्याणकामी) हैं, और वह हैं नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम।

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इस्तिंजा तथा क़ज़ाये हाजत (पेशाब पाख़ाना) के आदाबः

इस्लामी शरीअत ने कोई ऐसा विषय नहीं छोड़ा जिस का सामना मुस्लिम को होता है मगर उस के आदाब और उसूल व ज़वाबित (नियम क़ानून) ज़रूर बनाये हैं। और उन्ही विषयों में से है क़ज़ाये हाजत से संबंधी आदाब। हम इस अध्याय में जानेंगे क़ज़ाये हाजत तथा इस्तिंजा के आदाब और नापाकी तथा पाकी (हदस और तहारत) की क़िस्में।

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