वर्तमान खंड: :मॉडल
पाठ तहारत से मुतअल्लिक़ ख़ास हालतें (पवित्रता संबंधी विशेष स्तिथियाँ)
:एक और छात्र गिनें जिस ने इस पाठ को पूरा किया है
चमड़े के मोज़ों और जुर्राबों पर मसह
वुज़ू करते समय चमड़े के मोज़ों और जुर्राबों पर मसह करना उस वक़्त मशरू (विधिसम्मत) है जब मुस्लिम उन्हें बड़ी और छोटी दोनों हदस से पाक हो कर पहना हो।
चमड़े के मोज़ों और जुर्राबों पर मसह करने की मुद्दत (अवधि)
मोज़ों पर मसह करना सिर्फ़ वुज़ू में सही-शुद्ध है। रही बात जनाबत के ग़ुस्ल की तो उस में हर हाल में पैरों को धोना ज़रूरी है।
चमड़े के मोज़ों और जुर्राबों पर मसह के वक़्त की शुरूआत हदस के बाद पहली बार मसह करने से होगी
स्प्लिंट (पट्टी) उस चीज़ को कहते हैं जो ज़ख़्म या फ्रेक्चर के कारण वुज़ू के अंगों पर रखी या बाँधी जाती है ताकि उपचार की गति में मदद और दर्द से राहत मिले।
जरूरत पड़ने पर स्प्लिंट (पट्टी) पर गीले हाथों से मसह करना स्वीकार्य (काफ़ी) है, चाहे वह वुज़ू में हो या जनाबत के ग़ुस्ल में हो।
अंग के बाहरी हिस्से को ज़रूर धोये और अपने गीले हाथों से पट्टी से ढके हिस्से पर मसह करे
स्प्लिंट (पट्टी) पर मसह की अवधि
तयम्मुम
तयम्मुम का तरीक़ा
मुस्लिम अपने दोनों हाथों को मिट्टी पर एक बार मारे
मिट्टी लगे अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे पर फेरे
फिर बायें हथेली से दायें हथेली के ऊपरी भाग का मसह करे, और फिर दायें हथेली से बायें हथेली के ऊपरी भाग का मसह करे।