वर्तमान खंड: :मॉडल
पाठ वुज़ू
:एक और छात्र गिनें जिस ने इस पाठ को पूरा किया है
वुज़ू की फ़ज़ीलत
मैं कैसे वुज़ू करूँ और हदसे अस्ग़र (छोटी नापाकी) को कैसे दूर करूँ?
नीयत
सुन्नत यह है कि अपनी दोनों हथेलीयों को पानी से तीन मरतबा धोये।
पानी से कुल्ली करे, अर्थात अपने मुँह के अंदर पानी डाल कर उसे वहीं गर्दिश कराये फिर बाहर फेंक दे। और उस के लिए ऐसा तीन बार करना मुस्तहब है तथा एक बार करना वाजिब है।
नाक में पानी चढ़ाये, अर्थात नाक के अंदरूनी हिस्सा में पानी पहुँचाये, फिर उसे झाड़ कर साफ़ करे। और उस के लिए इस में मुबालग़ा (अत्युक्ति) करना मुस्तहब है मगर यह कि यह उस के लिए हानि का सबब बने या वह रोज़े से हो। और ऐसा एक बार करना वाजिब है तथा तीन बार करना मुस्तहब है।
अपना चेहरा -पेशानी के ऊपर बाल निकलने की जगह से ठूड़ी के नीचे तक और एक कान से दूसरे कान तक- धोये। और दोनों कान चेहरा में शामिल (के अंतर्गत) नहीं हैं। और ऐसा एक बार करना वाजिब है तथा तीन बार करना मुस्तहब है।
उँगलीयों के किनारे से कुहनीयों तक अपने दोनों हाथों को धोये। और दोनों कुहनीयाँ धोने में दाख़िल हैं। पहले दायाँ हाथ धोना और तीन तीन बार धोना मुस्तहब है। तथा एक बार धोना वाजिब है।
अपने सर का इस तरह मसह करे कि अपने दोनों हाथों को पानी से भिगो ले फिर उन्हे सर के अगले भाग से गुद्दी तक ले जाये, और फिर उन्हे सर के अगले भाग तक दोबारा वापस ले आये। और दूसरे अंगों की तरह सर का मसह तीन बार करना मसनून नहीं है, बल्कि एक ही बार करेगा।
सर का मसह करने के बाद अपने दोनों कानों का इस तरह मसह करे कि अपनी दोनों शहादत (तर्जनी) उँगलीयों को कानों के अंदरूनी भाग में दाख़िल कर के अंदर का और दोनों अंगूठे के ज़रीया कानों के ऊपरी हिस्से का मसह करे।
टखनों समेत अपने दोनों पैरों को धोये। और बेहतर है कि दायाँ पैर से शुरू करे। और हर पैर को तीन तीन बार धोना मुस्तहब है, लेकिन वाजिब एक ही बार है। और अगर मोज़े पहने हुये हो तो चंद शर्तों के साथ उन पर मसह करना जायज़ है।