वर्तमान खंड: :मॉडल
पाठ आम अहकाम जो यात्राओं में बेशतर पेश आते हैं
:एक और छात्र गिनें जिस ने इस पाठ को पूरा किया है
उस आग को सोने से पहले बुझा देना चाहिए जो मौसमे सरमा के यात्राओं में अक्सर जलाई जाती है, ख़ास कर के ख़ीमों वग़ैरा में।
मूल सिद्धांत यह है कि शिकार की अनुमति है, लेकिन शिकार को दिल के साथ जुड़ने और दीन और परिवार के हितों से हटने या फ़ुज़ूल ख़र्ची, ला परवाही और शेख़ी बघारने का कारण नहीं होना चाहिए। हदीस में हैः “जिस ने जंगल में सुकूनत इख़्तियार की वह सख़्त दिल हुआ, और जो शिकार के पीछे पड़ा वह ग़ाफ़िल हुआ।” {अबू दाऊदः 2859}
मूल सिद्धांत यह है कि सभी जानवरों का शिकार करना और उन का खाना जायज़ है, सिवाय उन जानवरों के जिन के निषेध पर दलील दलालत करे, जैसे कि भेड़ियों और लोमड़ियों जैसे हर नुकीले जंगली जानवर, और हर पंजे वाला परिंदा जैसे चील, और जहरीले जानवर जैसे सांप वग़ैरा।
पूरे साल जंगली और समुद्री जानवरों का शिकार करने की अनुमति है। इस में शुक्रवार या रमजान या हुर्मत वाले महीनों और अन्य महीनों के बीच कोई अंतर नहीं है, लेकिन मक्का या मदीना के हरम एरीये में शिकार करना मना है, और दूसरों के स्वामित्व वाले जानवरों का शिकार करना मना है, और मुहरिम के लिए जंगली जानवरों का शिकार करना मना है।
यह आवश्यक है कि शिकारी मुस्लिम हो, और वह अल्लाह का नाम ले, और यह कि वह शिकार में प्रशिक्षित कुत्तों या पक्षियों द्वारा शिकार करे। चुनांचि अगर परिंदा ख़ुद से उड़ जाये या शिकारी के इल्म के बग़ैर गोली चल जाये, तो शिकार का खाना जायज़ नहीं है मगर यह कि वह उसे उस की मृत्यु से पहले पा ले और अल्लाह का नाम ले कर उसे ज़बह कर दे।
इसी तरह यह भी आवश्यक है कि शिकार की मृत्यु उस के ज़ख़्मी होने के कारण हुई हो, न कि यह उस का गला घोंट दे, उसे डुबो दे, उसे भारी वजन से मार दे, या उसे ऊंचाई से गिरा दे। और जब वह शिकार को स्थिर जीवन में पाये, तो वह उसे शरिया कानून के अनुसार ज़बह करे।
छेड़ छाड़ के लिए (बेफ़ायदा तथा अनर्थक) शिकार करना मना है, जैसे कि वह व्यक्ति जो शिकार करता है और खाता नहीं है। इसी तरह शिकार के आले से लोगों को डराना भी हराम है। नीज़ शिकार में व्यायाम (मश्क़) करने के लिए पक्षियों को बांधना भी पाप है।
हथियार से दूसरों की ओर इशारा करना हराम है अगर चे हँसी मज़ाक़ या खेल कूद में ही क्यों न हो। क्योंकि हदीस में हैः “तुम में से कोई शख़्स अपने भाई की तरफ़ हथियार से इशारा न करे, इस लिए कि वह नहीं जानता कि शायद शैतान उस के हाथ से चलवा दे, और वह जहन्नम के गढ़े में जा गिरे।” {बुख़ारीः 7072, मुस्लिमः 2617} और दूसरी हदीस में हैः “जिस ने अपने भाई की तरफ़ धारदार आले से इशारा किया तो जब तक वह नीचे नहीं कर लेता, फ़रिश्ते उस पर लानत करते रहते हैं, अगर चे वह उस का हक़ीक़ी (सगा) भाई हो।” {मुस्लिमः 2616}
शिकार करने वाले को अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए शिकार के नियमों और सुरक्षा सावधानियों को जानना चाहिए। वध करने की विधि (जानवर का शरई तौर पर ज़बह करना), शिकार करने वाले कुत्तों से निपटने, शिकार की मौत के मामलों आदि पर विशेष नियम हैं, इस लिए इस बारे में विद्वानों की ओर रुजू करे।
मूल सिद्धांत यह है कि खाद्य पदार्थ हलाल है जब तक कि सबूत यह इंगित न करे कि यह निषिद्ध है
खाने पीने की चीज़ों में जो हराम है उन में सेः
जंगल में या बाजारों में पाए जाने वाले सभी पौधे और फल जायज़ हैं, लेकिन मुसलमान को वह चीज़ नहीं खानी चाहिए जो उसे नुकसान पहुंचा सकती है, या जिस चीज़ के सुरक्षित होने का उसे इल्म न हो।